आज के नए लेख में बताया गया है कि पैरों की इस हरकत से हो सकता है हार्ट अटैक।
जाने अनजाने में हम लोगों की कुछ ऐसी हरकतें होती हैं जो काफी नुकसानदायक होती है लेकिन हम लोग कभी इस पर ध्यान नहीं देते हैं। जिसके कारण से आने वाले समय में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए अपनी आदतों और अपनी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए कि हमारी आदत कई नुकसानदायक तो नहीं है।
आज के लेख में बताया गया है कि लोगों द्वारा किए जाने वाले हरकत से हार्ट अटैक की समस्या हो सकती है। आइए ऐसी आदतों के बारे में जाने -
हमारे चैनल के माध्यम से मानव जाति को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों के बारे में आवश्यक सावधानियो के बारे में और इसके साथ-साथ समस्याओं के निराकरण के बारे में भी आसान और सरल तरीके से समय-समय पर जनहित में जानकारी दी जाती है।
बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अगर कुर्सी पर बैठे हैं या चारपाई पर बैठे हैं या बेड पर बैठे हैं या लेटे हुए हैं या ऑफिस में कुछ काम कर रहे हैं या बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यह सब क्रिया कलाप करते समय कुछ लोग बार-बार अपने पैरों को हिलाते रहते हैं। काम करते समय पैरों को हिलाने का क्या मतलब है ? क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि आपकी यह हरकत एक बीमारी भी हो सकती है।
बीमारी के लक्षण इस प्रकार है जिससे आप ध्यान से सुने
यदि पैरों में झन्नझनाहट या चीटियों के चलने जैसे महसूस हो या रात में सोते समय पैरों को हिलाने की इच्छा उत्पन्न हो या पैरों में थकावट के कारण से पैर दबवाने की इच्छा हो तो यह लक्ष्ण बीमारी के हो सकते हैं।
बीमारी के कारण जानना बहुत ही जरूरी है।
शोध से पता चला है कि इस बीमारी का कारण आयरन की कमी है इसके अलावा किडनी या पार्किसंस में पीड़ित होने में ऐसी समस्या देखी गई है।
महिलाओं में डिलीवरी के अंतिम दिनों में हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसी समस्या हो सकती है।
शराब पीने या कुछ खास दवाइयों के सेवन से भी इस समस्या का इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
हावर्ड मेडिकल स्कूल बोस्टन के प्रोफेसर और इस शोध के प्रमुख डॉक्टर डब्ल्यू विकमैन का कहना है कि औसतन लोगों में नींद न आने के कारण यह समस्या देखने को मिलती है। इसमें 200 से 300 बार पैर हिलाते देखे जाते हैं। यह समस्या रेस्टलेसलेग सिड्रोम के कारण से हो सकती है और शोध में यह भी ज्ञात हुआ है कि लगभग 10% लोगों में यह समस्या देखने को मिलती है।
ज्यादातर यह समस्या 35 वर्ष के बाद के लोगों में देखने को मिलती है। यह नर्वस सिस्टम से जुड़ा हुआ रोग है। पैर हिलाने से व्यक्ति में डोपामाइन हारमोंस उत्पन्न होने के कारण उसे ऐसा करने का बार-बार मन करता है। इसे स्लीप डिसऑर्डर भी कहते हैं। नींद पूरी न होने से व्यक्ति थका सा महसूस करता है।
इसका जांच रोग के लक्षण के आधार पर ब्लड टेस्ट द्वारा किया जाता है। नींद की समस्या ज्यादा बढ़ने पर पाली सोमोनोग्राफी (PSG) भी करवा कर पुष्टि की जाती है।
शरीर के ऐसे कई लक्षण जो हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं इसलिए हमें अपनी आदतों पर अवश्य ध्यान देना चाहिये